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हिन्दू विवाह की सभी मुख्य रस्में Hindu Wedding Rituals Step by Step

आज हमने इस आर्टिकल में हिन्दू विवाह की सभी प्रमुख रस्मों (Hindu Wedding Rituals in Hindi) के विषय में बताया है। इन हिन्दू विवाह अनुष्ठानों का शादी में अच्छे से निभाना बहुत ही ज़रूरी माना जाता है। भले ही हिन्दू व्यक्ति आमिर हो या गरीब अपने विवाह के दौरान इन रस्मों या अनुष्ठानों को निभाते हैं। संभवतया दुनिया में सबसे पुराना धर्म   HINDU HAI , जिसकी अनुमानित ऐतिहासिक धरोहर 3000 ईसा पूर्व है। इसकी बहुत सी परंपराएं युगों युगों तक चली और कुछ छदम समय पर ही नष्ट हो गई। हिन्दू विवाह, विधि-विधान की एक अत्यंत पवित्र विधि है जिसमें कई कालातीत कर्मकांड और रीति-रिवाजों का समावेश है। कहते है शादी वह बंधन है जिसके माध्यम से सिर्फ दो दिलों का मिलन नहीं होता है, बल्कि दो परिवारों का मिलन होता है। इस रस्म के बाद वर-वधू सहित दोनों के परिवारों का जीवन पूरी तरह बदल जाता है। इसलिए विवाह के संबंध में कई महत्वपूर्ण सावधानियां रखना जरूरी है। विवाह के बाद वर-वधू का जीवन सुखी और HAPPYNESS SE BHARA  हो यही कामना की जाती है। विवाह (संस्कृतः विवाह) को उत्तर भारत में विवाह तथा दक्षिण भारत में कल्याणम् कहा जात...

मां काली से जुड़ा है कृष्ण की मूर्ति का रहस्य

  मां काली से जुड़ा है कृष्ण की खंडित मूर्ति का रहस्य 1/20 1 मां काली हिन्दू मान्यताओं में 33 करोड़ देवी-देवताओं का जिक्र किया गया है, जिनमें से एक हैं मां काली। मां काली के चमत्कारों से जुड़े अनेक किस्से हमारे पौराणिक इतिहास में विद्यमान हैं। इन्हीं किस्सों या कहानियों में से एक है मां काली के दक्षिणेश्वर मंदिर का निर्माण। 2/20 2 दक्षिणेश्वर काली मंदिर दक्षिणेश्वर काली मंदिर का निर्माण एक शूद्र जमींदार की विधवा पत्नी रासमणी ने करवाया था। जिस दौर में इस मंदिर का निर्माण हुआ उस काल में संपूर्ण बंगाल में कुलीन प्रथा जोरों पर थी। ऐसे में एक शूद्र स्त्री द्वारा इस मंदिर का निर्माण और साथ ही इस मंदिर को समाज द्वारा स्वीकार करने के पीछे एक अद्भुत कथा छिपी हुई है। 3/20 3 रासमणी बंगाल के एक जमींदार राजचंद्र की पत्नी रासमणी को एक रात स्स्वप्न में स्वयं मां काली ने आकर दर्शन दिए। स्वयं काली ने उन्हें एक ऐसे स्थान का परिचय करवाया जहां उस मंदिर का निर्माण होना था। 4/20 4 मंदिर का निर्माण धन की कोई कमी ना होने की वजह से रासमणी ने मां काली को समर्पित इस मंदिर का निर्माण करवाने की ठान ली। सन 1847 मे...

कालका मंदिर के स्थल पर प्रकट हुई थीं मां भगवती 'महाकाली'

  नई दिल्ली : अरावली पर्वत श्रृंखला के सूर्यकूट पर्वत पर विराजमान कालकाजी मंदिर के नाम से विख्यात 'कालिका मंदिर' देश के प्राचीनतम सिद्धपीठों में से एक है। जहां नवरात्र में हजारों लोग माता का दर्शन करने पहुंचते हैं। इस पीठ का अस्तित्व अनादि काल से है। माना जाता है कि हर काल में इसका स्वरूप बदला। मान्यता है कि इसी जगह आद्यशक्ति माता भगवती 'महाकाली' के रूप में प्रकट हुई और असुरों का संहार किया। तब से यह मनोकामना सिद्धपीठ के रूप में विख्यात है। मौजूदा मंदिर बाबा बालक नाथ ने स्थापित किया। उनके कहने पर मुगल सम्राज्य के कल्पित सरदार अकबर शाह ने इसका जीर्णोद्धार कराया। मंदिर के महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया कि असुरों द्वारा सताए जाने पर देवताओं ने इसी जगह शिवा (शक्ति) की अराधना की। देवताओं के वरदान मांगने पर मां पार्वती ने कौशिकी देवी को प्रकट किया। जिन्होंने अनेक असुरों का संहार किया लेकिन रक्तबीज को नहीं मार सकीं। तब पार्वती ने अपनी भृकुटी से महाकाली को प्रकट किया। जिन्होंने रक्तबीज का संहार किया। महाकाली का रूप देखकर सभी भयभीत हो गए। देवताओं ने काली की स्तुति की तो मां भगव...

काला जादू क्या होता है, कैसे बचे इससे, जानिए...

  काला जादू, टोने, टोटके या अन्य किसी के द्वारा किया कराया जैसी बातें भी समाज में प्रचलित है। हालांकि इनकी सचाई के बारे में कोई नहीं जानता। कुछ लोग मानते हैं कि काला जादू होता है और कुछ लोग इसे वहम मानते हैं। अब यह तो शोध का विषय हो सकता है। माना जाता है कि काला जादू उसे कहते हैं जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने स्वार्थ को साधने का प्रयास करता है या किसी को नुकसान पहुंचाना के काम करता है। बंगाल और असम को काला जादू का गढ़ माना जाता रहा है। काले जादू के माध्यम से किसी को बकरी बनाकर कैद कर लिया जाता है या फिर किसी को वश में कर उससे मनचाहा कार्य कराया जा सकता है। काले जादू के माध्यम से किसी को किसी भी प्रकार के भ्रम में डाला जा सकता है और किसी को मारा भी जा सकता है। METRO PLUS मर्दो वाले समस्याओं से थक गए? सभी पुरुष इसका उपयोग करते हैं और जानें → माना जाता है कि काला जादू शरीर में नकारात्‍मक ऊर्जा उत्‍पन्‍न करता है। ये शक्तियां बाहरी व्‍यक्ति के द्वारा भेजी जाती हैं जो उस व्‍यक्ति पर आतंरिक प्रभाव डालती है। दरअसल काला जादू मनोवैज्ञानिक ढंग से कार्य करता है। काला जादू करने वाले आपके अचेतन म...

इन संकेतों से पता चलता है की काला जादू हुआ है या नहीं

  सूर्यग्रहण के दिन होता है काला जादू         अक्सर लोग काला जादू और वूडू का नाम सुनते ही कांपना शुर हो जाते हैं। दरअसल काली शक्तियों का प्रतीक काले जादू को मानते हैं। सच तो यह है कि काला जादू नाम का कुछ नहीं होता है। बता दें कि काला जादू एक तरह का मैजिक ही होता है।  व्यक्तिगत लाभ और दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिय मैजिक का इस्तेमाल लोग करते हैं जिसे काला जादू बोल दिया गया। मूठकर्णी विद्या, वशीकरण, स्तंभन, मारण, भूत-प्रेत टोने और टोटके यह सब काले जादू के अंदर आते हैं। तांत्रिक विद्या के नाम से भी काले जादू को जाना जाता है। इसका विस्तार भारत के बौद्ध धर्म के ब्रजयान समुदाय में माना गया है।  ज्योतिषीय योग काले जादू का  व्यक्ति की कुंडली में ग्रह दोष कुछ होता है तभी उसके ऊपर काले जादू का असर होता है। अगर सूर्य, चंद्र, शनि और मंगल विशेष भावों से कुंडली में राहु-केतु से पीड़ित होते हैं तभी उन लोगों पर बुरी शक्तियों को असर होता है। ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि काले जादू का असर सूर्य ग्रहण वाले दिन बहुत होता है। दरअसल राशियों की स्थिति में बहुत ज्य...